स्तम्भ menu

Drop Down MenusCSS Drop Down MenuPure CSS Dropdown Menu

गुरुवार, 17 मार्च 2016

muktika

मुक्तिका-
मापनी: 1222 - 1222 - 122
*
हजारों रंग हैं फागुन मनाओ 
भुला शिकवे कबीरा आज गाओ 
*
तुम्हें सत्ता सियासत हो मुबारक
हमें सीमा बुलाती, शीश लाओ
*
न खेलो खेल मजहब का घिनौना
करो पूजा-इबादत सर झुकाओ
*
जुबां से मौन ज्यादा बोलता है
न लफ्जों को बिना मकसद लुटाओ
*
नरमदा नेह की सूखे न यारों
सफाई हो,सभी को साथ पाओ
*
कहो जय हिन्द, भारत माँ की जय-जय
फखर से सिर 'सलिल' अपना उठाओ
*
दिलों में दूरियाँ होने न देना
गले मिल, बाँह में लें बांह आओ
***
[बहर:- बहरे-हज़ज मुसद्दस महज़ूफ। वज़्न:-1222 - 1222 - 122 अरकानमफ़ाईलुन मफ़ाईलुन फ़ऊलुन काफ़िया-आ रदीफ़- ओ फ़िल्मी गीत अकेले हैं चले आओ जहाँ हो। मिसरा ये गूंगा गुनगुनाना जानता है।]

कोई टिप्पणी नहीं: