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शुक्रवार, 20 मई 2016

doha

दोहा सलिला
*
सपने देखे तो किया, हमने हसीं गुनाह
टैक्स लगा दो जेटली, हमें नहीं परवाह
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अच्छे दिन की आस में, जीना हुआ हराम
मरने की हिम्मत नहीं, लकड़ी-ऊँचे दाम
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सूर्य आग बरसा रहा, ताप सके तो ताप
कांग्रेस सुनकर हुई, इस चुनाव में भाप
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दीदी का दम देखकर, बड़े-बड़े हैं दंग
दादाओं की हो गयी, अब तो हुलिया तंग
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जनता परकम्मा करे, अम्मा दें आशीष
करुण अंत करुणानिधी, खड़े झुकाये शीश
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लेफ्ट जहाँ राइट हुआ, राइट लगता रॉन्ग
बंद हो गया गूंजना, जय राहुल का सांग
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आसू के आँसू बहे, देख सर्व आनंद
कमल लिये सम असम में, सुना रहे हैं छंद
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चित्त अखाड़ेबाज हैं, हार चुनावी दाँव
बड़े-बड़ों के शीश पर, रही न बाकी छाँव
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हुए प्रमाणित खबरिए, गलत न जानें हाल
जो था इनके भरोसे, महसूसे भूचाल
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