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शनिवार, 21 मई 2016

muktika

मुक्तिका 
संजीव 
*
मखमली-मखमली 
संदली-संदली 
.
भोर- ऊषा-किरण 
मनचली-मनचली  
.
दोपहर है जवाँ 
खिल गयी नव कली 
.
साँझ सुन्दर सजी
साँवली-साँवली  
.
चाँद-तारें चले 
चन्द्रिका की गली 
.
रात रानी न हो  
बावली-बावली
.
राह रोके खड़ा 
दुष्ट बादल छली 
***
(दस मात्रिक दैशिक छन्द 
रुक्न- फाइलुन फाइलुन)

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