स्तम्भ menu

Drop Down MenusCSS Drop Down MenuPure CSS Dropdown Menu

मंगलवार, 24 मई 2016

muktika

मुक्तिका
*
कलश हो या नहीं हो, आधार हो
ज़िंदगी को ज़िंदगी से प्यार हो
.
कदम छोटे-बड़े तय कर फासले
सँग उठें तो सफलता गलहार हो
.
दिल दिया या दिल लिया दिल ने 'सलिल'
दिलवरी पूजा, नहीं व्यापार हो
.
शिलापट के लेख बन-मिटते रहे
कंकरों में शंकरी दीदार हो
.
छल-फरेबों से विजय, कब चाहिए?
बेहतर है साथ सच के हार हो
.
खिड़कियों से लाख झाँके धूप आ
देख लेना घरमें आँगन-द्वार हो
.
कमर के नीचे न हमला कीजिए
सामने आ सामने से वार हो
***
१०-५-२०१६
२५६ आवास-विकास हरदोई

कोई टिप्पणी नहीं: