स्तम्भ menu

Drop Down MenusCSS Drop Down MenuPure CSS Dropdown Menu

सोमवार, 20 जून 2016

dwipadiyan

एक रचना 
*
प्रभु जी! हम जनता, तुम नेता
हम हारे, तुम भए विजेता।। 

प्रभु जी! सत्ता तुमरी चेरी  
हमें यातना-पीर घनेरी ।। 

प्रभु जी! तुम घपला-घोटाला   
हमखों मुस्किल भयो निवाला।।

प्रभु जी! तुम छत्तीसी छाती   
तुम दुलहा, हम महज घराती।।

प्रभु जी! तुम जुमला हम ताली 
भरी तिजोरी, जेबें खाली।।

प्रभु जी! हाथी, हँसिया, पंजा 
कंघी बाँटें, कर खें गंजा।।

प्रभु जी! भोग और हम अनशन   
लेंय खनाखन, देंय दनादन।।

प्रभु जी! मधुवन, हम तरु सूखा  
तुम हलुआ, हम रोटा रूखा।।

प्रभु जी! वक्ता, हम हैं श्रोता 
कटे सुपारी, काट सरोता।।
(रैदास से क्षमा प्रार्थना सहित)
​***
२०-११-२०१५ 
चित्रकूट एक्सप्रेस, उन्नाव-कानपूर
 

कोई टिप्पणी नहीं: