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गुरुवार, 2 जून 2016

indravajra chhand

रसानंद दे छंद नर्मदा ३२  ​​ : इंद्रवज्रा छन्द 

​दोहा, ​सोरठा, रोला, ​आल्हा, सार​,​ ताटंक, रूपमाला (मदन), चौपाई​, ​हरिगीतिका, उल्लाला​,गीतिका,​घनाक्षरी, बरवै, त्रिभंगी, सरसी, छप्पय, भुजंगप्रयात, कुंडलिनी, सवैया, शोभन या सिंहिका, सुमित्र, सुगीतिका, शंकर, मनहरण (कवित्त/घनाक्षरी) तथा उपेन्द्रवज्रा छंदों से साक्षात के पश्चात् मिलिए​  इंद्रा वज्रा छन्द ​से

 इन्द्रवज्रा छन्द एक सम वर्ण वृत्त छन्द है। इसके प्रत्येक चरण में 11-11 वर्ण होते हैं। इसका लक्षण ''स्यादिन्द्रवज्रा यदि तौ जगौ गः'' अर्थात इन्द्रवज्रा के प्रत्येक चरण में दो तगण, एक जगण और दो गुरु के क्रम से वर्ण रखे जाते हैं । इसका स्वरुप इस प्रकार है-

ऽऽ ।        ऽऽ ।        ।ऽ ।        ऽऽ
तगण    तगण    जगण    दो गुरु
उदाहरण-
विद्येव पुंसो महिमेव राज्ञः
प्रज्ञेव वैद्यस्य दयेव साधोः।
लज्जेव शूरस्य मुजेव यूनो,
सम्भूषणं तस्य नृपस्य सैव॥
उदाहरण- 
०१. होता उन्हें केवल धर्म प्यार, सत्कर्म ही जीवन का सहारा 
०२. माँगो न माँगो भगवान देंगे
       चाहो न चाहो भव तार देंगे।  
       होगा वही जो तकदीर में है, 
       तदबीर के भी अनुसार देंगे।।  -संजीव 
०३.  आवारगी से सबको बचाना 
       सीखा यही है सबको सिखाना 
       जो काम आये वह काम का है 
       जो देश का है वह नाम का है -रामदेव लाल विभोर 
०४. नाते निभाना मत भूल जाना 
       वादा किया है करके निभाना 
       तोडा भरोसा जुमला बताया
        लोगों न कोसो खुद को गिराया -संजीव  

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