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शुक्रवार, 29 जुलाई 2016

doha muktika

दोहा मुक्तिका 
*
जो करगिल पर लड़ मरे, उनके गायें गान 
नेता भी हों देश-हित, कभी-कहीं क़ुर्बान 
*
सुविधा-भत्ते-पद नहीं, एकमेव हो लक्ष्य
सेना में भेजें कभी, अपनी भी संतान
*
पेंशन संकट हो सके, चन्द दिनों में दूर
अफसर-सुत सैनिक बनें, बाबू-पुत्र जवान
*
व्यवसायी के वंशधर, सरहद पर बन्दूक
थामें तो कर चुराकर, बनें न धन की खान
*
अभिनेता कुलदीप हों, सीमा पर तैनात
नर-पशु को मारें नहीं, वे बनकर सलमान
*
जज-अधिवक्ता-डॉक्टर, यंत्री-ठेकेदार
अनुशासित होकर बनें, देश हेतु वरदान
*
एन.सी.सी. में हर युवा, जाकर पाये दृष्टि
'सलिल' तभी बन सकेंगे, तरुण देश का मान
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