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मंगलवार, 23 अगस्त 2016

doha

दोहा सलिला 
*
चुप्पी को शेयर किया, बात हो गयी गोल
मन की मन में रख नहीं, जो जी चाहे बोल
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मन की बात न की अगर, कहना पचे न मीत
बात घटाती दूरियां, बात बढ़ाती प्रीत
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बात कही तो खो दिया, उस पर से अधिकार
रही अनकही तो तो करे कौन उसे स्वीकार
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बात गलत भी हो सही, कहता अगर समर्थ
बात सही भी हो गलत, कहे अगर असमर्थ
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बात न हो बेबात की, तब हो उसका मोल
बोल बाद में बात तू, पहले मन में तोल
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बात अमिय बरसा सके, देती विष भी घोल
तूफानों को शांत कर, ला सकती भूडोल
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बात महाभारत करा, करवा सकती युद्ध
सोच-समझ कहते सदा, बातें 'सलिल' प्रबुद्ध
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