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शनिवार, 10 सितंबर 2016

नवगीत

एक रचना
कौन हैं हम?
*











*
कौन हैं हम?
देह नश्वर,
या कि  हैं आत्मा चिरन्तन??
*
        स्नेह सलिला नर्मदा हैं।
          सत्य-रक्षक वर्मदा हैं।
           कोई माने या न माने
          श्वास सारी धर्मदा हैं।
जान या
मत जान लेकिन
मित्र है साहस-प्रभंजन।
कौन हैं हम?
देह नश्वर,
या कि  हैं आत्मा चिरन्तन??
*
       सभ्यता के सिंधु हैं हम,
     भले लघुतम बिंदु हैं हम।
        गरल धारे कण्ठ में पर
     शीश अमृत-बिंदु हैं हम।
अमरकंटक-
सतपुड़ा हम,
विंध्य हैं सह हर विखण्डन।
कौन हैं हम?
देह नश्वर,
या कि  हैं आत्मा चिरन्तन??
*
         ब्रम्हपुत्रा की लहर हैं,
     गंग-यमुना की भँवर हैं।
     गोमती-सरयू-सरस्वति
अवध-ब्रज की रज-डगर हैं।
बेतवा, शिव-
नाथ, ताप्ती,
हमीं क्षिप्रा, शिव निरंजन।
कौन हैं हम?
देह नश्वर,
या कि  हैं आत्मा चिरन्तन??
*
        तुंगभद्रा पतित पावन,
       कृष्णा-कावेरी सुहावन।
        सुनो साबरमती हैं हम,
   सोन-कोसी-हिरन भावन।
व्यास-झेलम,
लूनी-सतलज
हमीं हैं गण्डक सुपावन।
कौन हैं हम?
देह नश्वर,
या कि  हैं आत्मा चिरन्तन??
*
           मेघ बरसे भरी गागर,
        करी खाली पहुँच सागर। 
       शारदा, चितवन किनारे-
        नागरी लिखते सुनागर। 
हमीं पेनर
चारु चंबल 
घाटियाँ हम, शिखर- गिरिवन
कौन हैं हम?
देह नश्वर,
या कि  हैं आत्मा चिरन्तन??
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१०-९-२०१६ 

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