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बुधवार, 14 सितंबर 2016

हास्य गीत

एक रचना 
*
छंद बहोत भरमाएँ 
राम जी जान बचाएँ 
*
वरण-मातरा-गिनती बिसरी 
गण का? समझ न आएँ 
राम जी जान बचाएँ 
*
दोहा, मुकतक, आल्हा, कजरी, 
बम्बुलिया चकराएँ 
राम जी जान बचाएँ 
*
कुंडलिया, नवगीत, कुंडली, 
जी भर मोए छकाएँ 
राम जी जान बचाएँ 

मूँड़ पिरा रओ, नींद घेर रई 
रहम न तनक दिखाएँ 
राम जी जान बचाएँ 

कर कागज़ कारे हम हारे 
नैना नीर बहाएँ 
राम जी जान बचाएँ 
*
ग़ज़ल, हाइकू, शे'र डराएँ 
गीदड़-गधा बनाएँ 
राम जी जान बचाएँ 
*
ऊषा, संध्या, निशा न जानी 
सूरज-चाँद चिढ़ाएँ 
राम जी जान बचाएँ 
*

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