स्तम्भ menu

Drop Down MenusCSS Drop Down MenuPure CSS Dropdown Menu

गुरुवार, 1 सितंबर 2016

laghukatha

लघुकथा
अवतार
*
संसद में एक दूसरे पाए आरोप लगाते नेता, भीषण जलप्लावन में डूबते लोग, कश्मीर में लगातार कर्फ्यू, शहर में महामारी नकारात्मक समाचारों से परेशान होकर कृष्ण जी को छट का भोग लगाकर उसने ध्यानमग्न हो प्रार्थना की- हे प्रभु! परिस्थितियाँ बहुत खराब हैं, अब तो अवतार ले लो।

जब तक यशोदा मैया की तरह गैर की सन्तान को बचाने के लिये अपनी सन्तान को दाँव पर लगानेवाली यशोदा जैसी माँ, अपने प्राण संकट में डालकर भी छोटे भाई को बचानेवाला बलदाऊ सा बड़ा भाई, बिना शंका सलाह मानकर आचरण करने वाला अर्जुन सा सखा, बिना स्वार्थ प्यार करने वाले ग्वाल-बाल न होंगे तब तक अकेला कृष्ण भी कुछ नहीं कर सकता। पहले तुम सब अपना आचरण सुधारो, तभी सार्थक हो सकेगा अवतार।
***

कोई टिप्पणी नहीं: