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बुधवार, 26 अक्तूबर 2016

geet

कार्य शाला 
नव गीत-  
जीवन की बगिया में
महकाये मोगरा
पल-पल दिन आज का।
(मुखड़ा ३ पंक्तियाँ, मात्राएँ १२+११+११ =३४)  
*
श्वास-श्वास महक उठे
आस-आस चहक उठे
नयनों से नयन मिलें
कर में कर बहक उठे
(अंतरा- ४ पंक्तियाँ, मात्राएँ १२+१२+१२+१२=४८)
प्यासों की अँजुरी में
मुस्काये हरसिंगार
छिन-छिन दिन आज का।
(सम मुखड़ा- ३ पंक्तियाँ, मात्राएँ १२+१२+११=३५)
जीवन की बगिया में
महकाये मोगरा
पल-पल दिन आज का।
(मुखड़ा ३ पंक्तियाँ, मात्राएँ १२+११+११ =३४)
*

रूप देख गमक उठे
चहरा चुप चमक उठे
वाक् हो अवाक 'सलिल'
शब्द-शब्द गमक उठे
(अंतरा- ४ पंक्तियाँ, मात्राएँ १२+१२+१२+१२=४८)
मंजरी में गीत की
खिलखिलाये सिर्फ प्यार
गिन -गिन दिन आज का।
(सम मुखड़ा- ३ पंक्तियाँ, मात्राएँ १२+१३+११=३६ )
जीवन की बगिया में
महकाये मोगरा
पल-पल दिन आज का।
(मुखड़ा ३ पंक्तियाँ, मात्राएँ १२+११+११ =३४)
*

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