हिन्दी हो जग-वाणी यदि, हम मिलकर करें प्रयास
 एक साथ मिल कलम चलायें, मन में लिये हुलास
सत-शिव-सुंदर शब्द-शब्द हो, सत-चित-आनंद अक्षर-
ऊर्जस्वित मन-प्राण कर, 'सलिल' जग में करें उजास
*
: जय हिंद : जय भारत : जय भारती : वंदे मातरम :

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Diwali Dohe: Sanjiv 'Salil', Voice sangya tandon

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शनिवार, 6 जून 2009

निमाड़ी कविता सदाशिव कौतुक, इंदौर

निमाड़ी कविता
सदाशिव कौतुक, इंदौर

लड़ई मत लडो रे! भई
लड़ई ने केको भलो करयो?
लड़ई में अल्यांग को मरयो
चाय वल्यांग को मरयो
हात कटs कटsगा पांय नs माथो
हुई जासे लेखरु उघाडा अडात
जो बचsगा वू बी मरेल सी कम नी हुता
तलवार अनs बंदूक नस
कदी कोई को भलो करयो?
मरन वालो मरी गयो
मारन वालो जीवतs जीव मरयो।
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