नर्मदाष्टक ॥मणिप्रवाल मूलपाठ॥ .............................................॥नर्मदाष्टक ॥मणिप्रवाल हिंदी काव्यानुवाद॥
.....................................................................................................................................संजीव वर्मा "सलिल"
देवासुरा सुपावनी नमामि सिद्धिदायिनी, .......................................सुर असुरों को पावन करतीं सिद्धिदायिनी,
त्रिपूरदैत्यभेदिनी विशाल तीर्थमेदिनी । ........................................त्रिपुर दैत्य को भेद विहँसतीं तीर्थमेदिनी।
शिवासनी शिवाकला किलोललोल चापला, ................................शिवासनी शिवकला किलोलित चपल चंचला,
तरंग रंग सर्वदा नमामि देवि नर्मदा ।।१।। ...............................भक्तिभाव में लीन सर्वदा, नमन नर्मदा ॥१॥
विशाल पद्मलोचनी समस्त दोषमोचनी, ...................................नवल कमल से नयन, पाप हर हर लेतीं तुम,
गजेंद्रचालगामिनी विदीप्त तेजदामिनी ।। ..............................गज सी चाल, दीप्ति विद्युत सी, हरती भय तम।
कृपाकरी सुखाकरी अपार पारसुंदरी, .........................................रूप अनूप, अनिन्द्य, सुखद, नित कृपा करें माँ
तरंग रंग सर्वदा नमामि देवि नर्मदा ।।२।। ..............................भक्तिभाव में लीन सर्वदा, नमन नर्मदा ॥२॥
तपोनिधी तपस्विनी स्वयोगयुक्तमाचरी, .......................................सतत साधनारत तपस्विनी तपोनिधी तुम,
तपःकला तपोबला तपस्विनी शुभामला । ..........................योगलीन तपकला शक्तियुत शुभ हर विधि तुम।
सुरासनी सुखासनी कुताप पापमोचनी, ..............................................पाप ताप हर, सुख देते तट, बसें सर्वदा,
तरंग रंग सर्वदा नमामि देवि नर्मदा ।।३।। ..............................भक्तिभाव में लीन सर्वदा, नमन नर्मदा ॥३॥
कलौमलापहारिणी नमामि ब्रम्हचारिणी, .....................................ब्रम्हचारिणी! कलियुग का मल ताप मिटातीं,
सुरेंद्र शेषजीवनी अनादि सिद्धिधकरिणी । ..................................सिद्धिधारिणी! जग की सुख संपदा बढ़ातीं ।
सुहासिनी असंगिनी जरायुमृत्युभंजिनी, ......................................मनहर हँसी काल का भय हर, आयु दे बढ़ा,
तरंग रंग सर्वदा नमामि देवि नर्मदा ।।४।। .............................भक्तिभाव में लीन सर्वदा, नमन नर्मदा ॥४॥
मुनींद्र वृंद सेवितं स्वरूपवन्हि सन्निभं, ....................................अग्निरूप हे! सेवा करते ऋषि, मुनि, सज्जन,
न तेज दाहकारकं समस्त तापहारकं । .......................................तेज जलाता नहीं, ताप हर लेता मज्जन ।
अनंत पुण्य पावनी, सदैव शंभु भावनी, ....................................शिव को अतिशय प्रिय हो पुण्यदायिनी मैया,
तरंग रंग सर्वदा नमामि देवि नर्मदा ।।५।। .............................भक्तिभाव में लीन सर्वदा, नमन नर्मदा ॥५॥
षडंगयोग खेचरी विभूति चंद्रशेखरी, .........................................षडंग योग, खेचर विभूति, शशि शेखर शोभित,
निजात्म बोध रूपिणी, फणीन्द्रहारभूषिणी । .............................आत्मबोध, नागेंद्रमाल युत मातु विभूषित ।
जटाकिरीटमंडनी समस्त पाप खंडनी, .......................................जटामुकुट मण्डित देतीं तुम पाप सब मिटा,
तरंग रंग सर्वदा नमामि देवि नर्मदा ।।६।। ..............................भक्तिभाव में लीन सर्वदा, नमन नर्मदा ॥६॥
भवाब्धि कर्णधारके!, भजामि मातु तारिके! ......................................कर्णधार! दो तार, भजें हम माता तुमको,
सुखड्गभेदछेदके! दिगंतरालभेदके! ...........................................दिग्दिगंत को भेद, अमित सुख दे दो हमको ।
कनिष्टबुद्धिछेदिनी विशाल बुद्धिवर्धिनी, .......................................बुद्धि संकुचित मिटा, विशाल बुद्धि दे दो माँ!,
तरंग रंग सर्वदा नमामि देवि नर्मदा ।।७।। .............................भक्तिभाव में लीन सर्वदा, नमन नर्मदा ॥७॥
समष्टि अण्ड खण्डनी पताल सप्त भैदिनी, ......................................भेदे हैं पाताल सात सब अण्ड खण्ड कर,
चतुर्दिशा सुवासिनी, पवित्र पुण्यदायिनी । ........................................पुण्यदायिनी! चतुर्दिशा में ही सुगंधकर ।
धरा मरा स्वधारिणी समस्त लोकतारिणी, ...........................................सर्वलोक दो तार करो धारण वसुंधरा,
तरंग रंग सर्वदा नमामि देवि नर्मदा ।।८।। ..............................भक्तिभाव में लीन सर्वदा, नमन नर्मदा ॥८॥
॥साभारःनर्मदा कल्पवल्ली, ॐकारानंद गिरि॥ संपर्कः दिव्यनर्मदा.ब्लागस्पाट.काम, ९४२५१८३२४४
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बुधवार, 15 अप्रैल 2009
नर्मदाष्टक ॥मणिप्रवाल मूल व हिंदी काव्यानुवाद॥, आचार्य संजीव 'सलिल'
प्रस्तुतकर्ता Posted by :
sanjiv verma
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