लोकतंत्र का नाम है. कहाँ लोक का तंत्र?
भीड़-तंत्र कहना उचित, इसमें भीड़ स्वतंत्र.
सधे लोकहित लोक से, तभी लोक का तंत्र.
पर कुछ चतुरों ने किया, इसे वोट का यंत्र.
राजनीति जनतंत्र की, है कापालिक तंत्र.
शाखाओं को सीचती, भूल मूल का मन्त्र.
यह भेड़ों की भीड़ है, यह भेड़ों की चल.
अर्ध शती बीती मगर, वही हाल बेहाल.
भेडें हैं भोली बहुत, समझ न पातीं चाल.
रहते इनमें भेडिये, ओढ़ भेड़ की खाल.
भेड़जनों के भेडिये, बनकर पहरेदार,
लोकतंत्र के नाम पर, करते स्वेच्छाचार.
भेडचाल छूटी नहीं, रहे भेड़ के भेड़.
यही चाहते भेडिये, खाएं खाल उधेड़.
भेड़ों में वह भेडिया, शामिल बनकर भेड़.
रोज भेड़ कम हो रहीं, खून रँगी है मेड.
यह भेड़ों की भीड़ जो, सबसे अधिक विशाल.
उसे हाँकते भेडिये, बदल-बदलकर खाल.
*************************
]
दिव्य नर्मदा : हिंदी तथा अन्य भाषाओँ के मध्य साहित्यिक-सांस्कृतिक-सामाजिक संपर्क हेतु रचना सेतु A plateform for literal, social and cultural writings. Bridges gap between HINDI and other languages, literature & other forms of expression.
स्तम्भ / लेबल
-acharya sanjiv 'salil'
(238)
-Acharya Sanjiv Verma 'Salil'
(195)
अंग्रेजी
(1)
अलंकार
(4)
अवधी
(4)
आयुर्वेद
(3)
आरोग्य आशा
(1)
कला
(1)
कविता
(32)
कहावत
(1)
कायस्थ
(1)
काव्यानुवाद
(4)
कुण्डलिनी
(1)
क्षणिका
(1)
गणेश
(1)
ग़ज़ल
(13)
गीत
(57)
गीति काव्य
(1)
गीतिका
(14)
घनाक्षरी
(2)
घरेलू नुस्खे
(3)
चिंतन
(3)
चित्रगुप्त
(5)
चौपाई
(1)
छत्तीसगढ़ी
(1)
जनक छंद
(2)
डॉ चित्रा चतुर्वेदी 'कार्तिका'
(1)
तसलीस (उर्दू त्रिपदी) अज़ीज़ अहमद अंसारी
(1)
दुर्गा
(3)
देश
(2)
दोहा
(65)
नर्मदा
(9)
नर्मदाष्टक
(1)
नव विधा
(1)
नवगीत
(41)
नारी विमर्श
(1)
निमाड़ी
(1)
नियाज़
(1)
नज़्म: संजीव 'सलिल'
(1)
परिचर्चा: चिट्ठाकारी और टिप्पणी-लेखन
(1)
पुरातत्व
(1)
पुस्तक समीक्षा
(1)
प्रकृति
(1)
प्राकृतिक चिकित्सा
(2)
प्रो. भागवत प्रसाद मिश्र 'नियाज़'
(1)
बाल साहित्य
(1)
बुंदेली
(1)
भक्ति काव्य
(1)
भजन
(15)
भवन
(1)
भारत
(7)
भोजपुरी
(5)
महादेवी वर्मा
(1)
मालवी
(1)
मुक्तक
(6)
मुक्तिका
(80)
मृदुल कीर्ति
(4)
राम
(7)
राष्ट्र वंदना
(1)
लघु कथा
(3)
लघुकथा
(13)
लेख: हिन्दी का हित चिंतन
(1)
विवाह गीत
(3)
विश्व काव्य सलिला : भागवत प्रसाद मिश्रा 'नियाज' '
(1)
शब्द सलिला: लखपति -अजित वडनेरकर
(1)
शान्ति देवी वर्मा
(1)
श्यामलाल उपाध्याय
(1)
श्यामानन्द 'सरस्वती'
(1)
श्री कृष्ण
(1)
संजीव 'सलिल'
(235)
संस्मरण
(1)
समाचार
(1)
साधना
(1)
सूक्ति सलिला: शेक्सपिअर
(1)
सूक्ति-सलिला:प्रो. बी. पी. मिश्र 'नियाज़' / सलिल
(1)
सोरठा
(1)
स्वर्गीय शान्ति देवी वर्मा
(1)
स्वास्थ्य: घरेलू नुस्खे
(1)
हरिगीतिका
(1)
हाइकु
(6)
हास्य
(6)
हिंदी
(6)
हिन्दी काव्यानुवाद
(1)
हिन्दी ग़ज़ल
(1)
हिन्दी छंद
(1)
ॐ
(1)
॥ श्रीरामरक्षास्तोत्र ॥
(2)
राजनीति लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
राजनीति लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
मंगलवार, 31 मार्च 2009
दोहे लोकतंत्र के - चंद्रसेन 'विराट'
| आपका मत your openion |
सदस्यता लें
संदेश (Atom)