दिव्य नर्मदा : हिंदी तथा अन्य भाषाओँ के मध्य साहित्यिक-सांस्कृतिक-सामाजिक संपर्क हेतु रचना सेतु A plateform for literal, social and cultural writings. Bridges gap between HINDI and other languages, literature & other forms of expression.
स्तम्भ / लेबल
रविवार, 30 अगस्त 2009
भजन: बहे राम रस गंगा -स्व. शान्ति देवी वर्मा
बहे राम रस गंगा,
करो रे मन सतसंगा.
मन को होत अनंदा,
करो रे मन सतसंगा...
राम नाम झूले में झूली,
दुनिया के दुःख झंझट भूलो.
हो जावे मन चंगा,
करो रे मन सतसंगा...
राम भजन से दुःख मिट जाते,
झूठे नाते तनिक न भाते.
बहे भाव की गंगा,
करो रे मन सतसंगा...
नयन राम की छवि बसाये,
रसना प्रभुजी के गुण गाये.
तजो व्यर्थ का फंदा,
करो रे मन सतसंगा...
राम नाव, पतवार रामजी,
सांसों के सिंगार रामजी.
'शान्ति' रहे मन रंगा,
करो रे मन सतसंगा...
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मंगलवार, 26 मई 2009
विरासत: भजन - स्व. शान्ति देवी वर्मा
ठांडे जनक संकुचाएँ
ठांडे जनक संकुचाएँ, राम जी को का देऊँ ?...
हीरा पन्ना नीलम मोती, मूंगा माणिक लाल।
राम जी को का देऊँ ?
रेशम कोसा मखमल मलमल खादी के थान हजार।
राम जी को का देऊँ ?
कुंडल बाजूबंद कमरबंद, मुकुट अंगूठी नौलख हार।
राम जी को का देऊँ ?
स्वर्ण-सिंहासन चांदी का हौदा, हाथीदांत की चौकी।
राम जी को का देऊँ ?
गोटा किनारी, चादर परदे, धोती अंगरखा शाल।
राम जी को का देऊँ ?
काबुली घोडे हाथी गौएँ शुक सारिका रसाल।
राम जी को का देऊँ ?
चंदन पलंग, आबनूस पीढा, शीशम मेज सिंगार।
राम जी को का देऊँ ?
अवधपति कर जोड़ मनाएं, चाहें कन्या चार।
राम जी को का देऊँ ?
'दुल्हन ही सच्चा दहेज़ है, मत दे धन सामान।'
राम जी को का देऊँ ?
राम लक्ष्मण भरत शत्रुघन, देन बहु विध सम्मान।
राम जी को का देऊँ ?
शुभाशीष दें जनक-सुनयना, 'शान्ति' होंय बलिहार।
राम जी को का देऊँ ?
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मंगलवार, 19 मई 2009
काव्य-किरण:
सारे जग को
जान रहे हम,
लेकिन खुद को
जान न पाए...
पीछे देखा.
गलत मिला
कर्मों का लेखा.
एक नहीं
सौ बार अजाने
लाँघी थी निज
लछमन रेखा.
माया ममता
मोह लोभ में,
फँस पछताए-
जन्म गँवाए...
पाँच ज्ञान की,
पाँच कर्म की,
दस इन्द्रिय
तज राह धर्म की.
दशकन्धर तन
के बल ऐंठी-
दशरथ मन में
पीर मर्म की.
श्रवण कुमार
सत्य का वध कर,
खुद हैं- खुद से
आँख चुराए...
जो कैकेयी
जान बचाए.
स्वार्थ त्याग
सर्वार्थ सिखाये.
जनगण-हित
वन भेज राम को-
अपयश गरल
स्वयम पी जाये.
उस सा पौरुष
जिसे विधाता-
दे वह 'सलिल'
अमर हो जाये...
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बुधवार, 6 मई 2009
भजन: मिथिला में सजी बरात -स्व. शांतिदेवी
मिथिला में सजी बरात
मिथिला में सजी बरात, सखी! देखन चलिए...
शंख मंजीरा तुरही बाजे, सजे गली घर द्वार।
सखी! देखन चलिए...
हाथी सज गए, घोड़ा सज गए, सज गए रथ असवार।
सखी! देखन चलिए...
शिव-बिरंचि-नारद जी नभ से, देख करें जयकार।
सखी! देखन चलिए...
रामजी की घोडी झूम-नाचती, देख मुग्ध नर-नार।
सखी! देखन चलिए...
भरत-लखन की शोभा न्यारी, जनगण है बलिहार।
सखी! देखन चलिए...
लाल शत्रुघन लगें मनोहर, दशरथ रहे दुलार।
सखी! देखन चलिए...
'शान्ति' प्रफुल्लित हैं सुमंत जी, नाच रहे सरदार।
सखी! देखन चलिए...
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बृहस्पतिवार, 30 अप्रैल 2009
भजन: गिरिजा पूजन... -स्व. शान्तिदेवी वर्मा.
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सिया फुलबगिया आई हैं
गिरिजा पूजन सखियों संग सिया फुलबगिया आई हैं...
कमर करधनी, पांव पैजनिया, चाल सुहाई है।
गिरिजा पूजन सखियों संग सिया फुलबगिया आई हैं...
कुसुम चुनरी की शोभा लख, रति लजाई है।
गिरिजा पूजन सखियों संग सिया फुलबगिया आई हैं...
चंदन रोली हल्दी अक्षत माल चढाई है।
गिरिजा पूजन सखियों संग सिया फुलबगिया आई हैं...
दत्तचित्त हो जग जननी की आरती गाई है।
गिरिजा पूजन सखियों संग सिया फुलबगिया आई हैं...
फल मेवा मिष्ठान्न भोग को नारियल लाई है।
गिरिजा पूजन सखियों संग सिया फुलबगिया आई हैं...
लताकुंज से प्रगट भए लछमन रघुराई हैं।
गिरिजा पूजन सखियों संग सिया फुलबगिया आई हैं...
मोहनी मूरत देख 'शान्ति' सुध-बुध बिसराई है।
गिरिजा पूजन सखियों संग सिया फुलबगिया आई हैं...
विधना की न्यारी लीला लख मति चकराई है।
गिरिजा पूजन सखियों संग सिया फुलबगिया आई हैं...
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बुधवार, 29 अप्रैल 2009
राम भजन : स्व. शान्ति देवी
सुनो री गुइयाँ, सुनो री गुइयाँ, राज कुंवर दो आए।
सुनो री गुइयाँ, सुनो री गुइयाँ...
कौन के कुंवर?, कहाँ से आए?, कौन काज से आए? 
कहो री गुइयाँ, कहो री गुइयाँ...
दशरथ-कुंवर, अवध से आए, स्वयम्वर देखे आए।
सुनो री गुइयाँ, सुनो री गुइयाँ...
का पहने हैं?, का धारे हैं?, कैसे कहो सुहाए?
कहो री गुइयाँ, कहो री गुइयाँ...
पट पीताम्बर, कांध जनेऊ, श्याम-गौर मन भये।
सुनो री गुइयाँ, सुनो री गुइयाँ...
शौर्य-पराक्रम भी है कछु या कोरी बात बनायें?
कहो री गुइयाँ, कहो री गुइयाँ...
राघव-लाघव, लखन शौर्य से मार ताड़का आए।
सुनो री गुइयाँ, सुनो री गुइयाँ...
चार कुंअरि हैं जनकपुरी में, कौन को जे मन भाए?
कहो री गुइयाँ, कहो री गुइयाँ...
अवधपुरी में चार कुंअर, जे सिया-उर्मिला भाए।
सुनो री गुइयाँ, सुनो री गुइयाँ...
विधि सहाय हों, कठिन परिच्छा रजा जनक लगाये।
कहो री गुइयाँ, कहो री गुइयाँ...
तोड़ सके रघुवर पिनाक को, सिया गिरिजा से मनाएं।
सुनो री गुइयाँ, सुनो री गुइयाँ...
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मंगलवार, 28 अप्रैल 2009
भजन सलिला: बाजे अवध बधैया -स्व शान्ति देवी
बाजे अवध बधैया
बाजे अवध बधैया, हाँ हाँ बाजे अवध बधैया...
मोद मगन नर-नारी नाचें, नाचें तीनों मैया।
हाँ-हाँ नाचें तीनों मैया, बाजे अवध बधैया..
मातु कौशल्या जनें रामजी, दानव मार भगैया
हाँ हाँ दानव मार भगैया बाजे अवध बधैया...
मातु कैकेई जाए भरत जी, भारत भार हरैया
हाँ हाँ भारत भार हरैया, बाजे अवध बधैया...
जाए सुमित्रा लखन-शत्रुघन, राम-भारत की छैयां
हाँ हाँ राम-भारत की छैयां, बाजे अवध बधैया...
नृप दशरथ ने गाय दान दी, सोना सींग मढ़ईया
हाँ हाँ सोना सींग मढ़ईया, बाजे अवध बधैया...
रानी कौशल्या मोहर लुटाती, कैकेई हार-मुंदरिया
हाँ हाँ कैकेई हार-मुंदरिया, बाजे अवध बधैया...
रानी सुमित्रा वस्त्र लुटाएं, साडी कोट रजैया
हाँ हाँ साडी कोट रजैया, बाजे अवध बधैया...
विधि-हर हरि-दर्शन को आए, दान मिले कुछ मैयाहाँ
हाँ हाँ दान मिले कुछ मैया, बाजे अवध बधैया...
'शान्ति'-सखी मिल सोहर गावें, प्रभु की लेनी बलैंयाँ
हाँ हाँ प्रभु की लेनी बलैंयाँ, बाजे अवध बधैया...
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