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शनिवार, 18 अप्रैल 2009

एक शेर

संजीव 'सलिल

इन्तिज़ार दिल से करोगे जो पता होता.
छोड़कर शर्मो-हया मैं ही मिल गयी होती.

शुक्रवार, 17 अप्रैल 2009

एक शे'र : आचार्य संजीव 'सलिल'

शिकवा न दुश्मनों से मुझको रहा 'सलिल'।

हैरत में हूँ दोस्तों ने प्यार से मारा।

बृहस्पतिवार, 16 अप्रैल 2009

एक शे'र : दोस्त -आचार्य संजीव 'सलिल'

ऐ 'सलिल' तू दिल को अब मजबूत कर ले।

आ रहे हैं दोस्त मिलने के लिए॥

बुधवार, 15 अप्रैल 2009

शे'र आचार्य संजीव 'सलिल'

शे'र

आचार्य संजीव 'सलिल'

दोस्त जब मेहरबां हुए हम पर।

दुश्मनों की न फिर ज़ुरूरत थी.


नर्मदा तट पर चौंसठ योगिनी मंदिर भेड़ाघाट जबलपुर