दिव्य नर्मदा : हिंदी तथा अन्य भाषाओँ के मध्य साहित्यिक-सांस्कृतिक-सामाजिक संपर्क हेतु रचना सेतु A plateform for literal, social and cultural writings. Bridges gap between HINDI and other languages, literature & other forms of expression.
स्तम्भ / लेबल
शुक्रवार, 17 सितम्बर 2010
मुक्तिका: सत्य -- संजीव 'सलिल'
मुक्तिका
सत्य
संजीव 'सलिल'
*
सत्य- कहता नहीं, सत्य- सुनता नहीं?
सरफिरा है मनुज, सत्य- गुनता नहीं..
*
ज़िंदगी में तुम्हारी कमी रह गयी.
सिर्फ कहता रहा, सत्य- चुनता नहीं..
*
आह पर वाह की, किन्तु करता नहीं.
दाना नादान है, सत्य- धुनता नहीं..
*
चरखा-कोशिश परिश्रम रुई साथ ले-
कातता है समय, सत्य- बुनता नहीं..
*
नष्ट पल में हुआ, भ्रष्ट भी कर गया.
कष्ट देता असत, सत्य- घुनता नहीं..
*
प्यास हर आस दे, त्रास सहकर उड़े.
वाष्प बनता 'सलिल', सत्य- भुनता नहीं..
*
| आपका मत your openion |
सोमवार, 3 मई 2010
POEM: ---Farhan Khan
POEM
FARHAN KHAN
Oh! God,
Why the earth had created.
For exploitation, knavery, thievery?
Man is exploited by man.
Man is deceived by man.
Why the earth had created?
Oh! God,
Why the winsome nature had created.
For wreckage, ruination, dilapidation?
Why man has become wrecker for nature?
Why the winsome nature had created?
Oh, God,
I pray for man,
To come in daylight,
From the gloom of night .
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| आपका मत your openion |
शनिवार, 20 फरवरी 2010
पठनीय रचना: शब्द मेरे हैं -प्रतिभा सक्सेना
अर्थ मैंने ही दिये ये शब्द मेरे हैं !
व्यक्ति औ अभिव्यक्ति को एकात्म करते जो ,
यों कि मेरे आत्म का प्रतिरूप धरते हों !
स्वरित मेरे स्वत्व के
मुखरित बसेरे हैं !
शब्द मेरे हैं !
*
स्वयं वाणी का कलामय तंत्र अभिमंत्रित,
लग रहा ये प्राण ही शब्दित हुये मुखरित,
सृष्टि के संवेदनों की चित्र-लिपि धारे
सहज ही सौंदर्य के वरदान से मंडित !
शाम है विश्राममय
मुखरित सबेरे हैं !
शब्द मेरे हैं !
*
बाँसुरी ,उर-तंत्र में झंकार भरती जो ,
अतीन्द्रिय अनुभूति बन गुंजार करती जो
निराकार प्रकार को साकार करते जो
मनोमय हर कोश के
सकुशल चितेरे हैं !
शब्द मेरे हैं !
*
व्याप्ति है 'मैं' की जहाँ तक विश्व- दर्पण में ,
प्राप्ति है जितनी कि निजता के समर्पण में
भूमिका धारे वहन की अर्थ-तत्वों के,
अंजली भर -भर दिशाओं ने बिखेरे हैं !
*
पूर्णता पाकर अहेतुक प्रेम से लहरिल
मनःवीणा ने अमल स्वर ये बिखेरे हैं !
ध्वनि समुच्चय ही न
इनके अर्थ गहरे हैं !
शब्द मेरे हैं !
साभार: ईकविता
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| आपका मत your openion |
शनिवार, 3 अक्तूबर 2009
दो कवितायेँ; लावण्या शर्मा, अमेरिका
लावण्या शर्मा, अमेरिका
(हिंदी साहित्य और चल-चित्र जगत के अनुपम गीतकार पं. नरेन्द्र शर्मा कि सुपुत्री लावण्या जी के गीतों में पिता से विरासत में मिले सनातन भारतीय संस्कारों की झलक और गूँज है. प्रस्तुत हैं दिव्य नर्मदा के पाठकों के लिए भेजी गयी दो विशेष रचनाएँ-सं.)
अहम ब्रह्मास्मि
असीम अनन्त, व्योम, यही तो मेरी छत है!
समाहित तत्त्व सारे, निर्गुण का स्थायी आवास
हरी-भरी धरती, विस्तरित, चतुर्दिक-
यही तो है बिछौना, जो देता मुझे विश्राम!
हर दिशा मेरा आवरण, पवन आभूषण -
हर घर मेरा जहाँ पथ मुड जाता स्वतः मेरा,
पथिक हूँ, हर डग की पदचाप -
विकल मेरा हर श्वास, तुमसे, आश्रय माँगता!
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श्वेत श्याम
दिवस-रात, श्वेत-श्याम,
एक उज्ज्वल, दूजा घन तमस
बीच मेँ फैला इन्द्रधनुष,
उजागर, किरणों का चक्र,
एक सूर्य के आगमन पर,
उसके जाते सब अन्तर्ध्यान!
तमस, जडता का फैलता साम्राज्य !
चन्द्र दीप, काले काले आसमाँ पर,
तारोँ नक्षत्रों की टिमटिमाहट,
सृष्टि के पहले, ये कुछ नहीं था -
सब कुछ ढँका था एक अँधेरे मेँ,
स्वर्ण गर्भ, सर्वव्यापी, एक ब्रह्म
अणु-अणु मेँ विभाजित, शक्ति-पुंज!
मानव, दानव, देवता, यक्ष, किन्नर,
जल-थल-नभ के अनगिनत प्राणी,
सजीव-निर्जीव, पार्थिव-अपार्थिव
ब्रह्माण्ड बँट गया कण-क़ण मेँ जब,
प्रतिपादित सृष्टि ढली संस्कृति में तब!
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| आपका मत your openion |
सोमवार, 18 मई 2009
काव्य किरण : WORDS -Dr. Ram Sharma,
Word breaks silence,
touches the hearts,
joins the minds,
fights the persons,
words are very powerful,
words are the real treasures,
of human beings.
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| आपका मत your openion |
मंगलवार, 24 मार्च 2009
* POETRY
mehak
Today on the road
While I was passing by
Saw u there
Thro corner of my eye
Since long we r not in touch
My fault I had forgoten u as such
Now all emotions,
Overwhelmed inside
Logging into old memories
Seeing u beside
Remembered ur cold touch
And ur kiss on my lips
Loved the way u drooled on my neck
And sometimes u on my nose tips
Couldn't control myself
To feel the same u again
So am near there u
Please come in my hands
The feel is so good
With u this world I forgot
Together we make good seen
Love always being with u
Ohh my delicious icecream.
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| आपका मत your openion |

