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मंगलवार, 28 जून 2011

एक कुण्डली: पानी बिन यमुना दुखी -- संजीव 'सलिल'

एक कुण्डली:                                                                                             
पानी बिन यमुना दुखी
संजीव 'सलिल'
*
पानी बिन यमुना दुखी, लज्जित देखे ताज.
सत को तजकर झूठ को, पूजे सकल समाज..
पूजे सकल समाज, गंदगी मन में ज्यादा.
समय-शाह को, शह देता है मानव प्यादा..
कहे 'सलिल' कविराय, न मानव कर नादानी.
सारा जीवन व्यर्थ, न हो यदि बाकी पानी..
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बुधवार, 17 जून 2009

poem: plant a tree- Dr. Ram Sharma, Meerut.

PLANT A TREE



Plant a tree,



become tension free,



water it with care,



no pollution will be there,



birds will chirp,



cool breeze will pup,



it provides shadow,



for peace of dove,



gives us lesson of sacrifice,



make us learn to be suffice,



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हिंदी काव्यानुवाद - संजीव 'सलिल'

एक पौधा लगायें


एक पौधा लगायें

तनाव से मुक्ति पायें

सावधानी से पानी दीजिये

प्रदूषण से पिंड छुडा लीजिये।

चिडियाँ चहचहांयेंगी।

शीतल पवन झूला झुलायेगी।

सघन परछाईं छायेगी।

शान्ति की राह दिखाएगी।

हमें पढ़ाएगी बलिदान का पाठ.

और सिखाएगी- 'कैसे हों ठाठ?'

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नर्मदा तट पर चौंसठ योगिनी मंदिर भेड़ाघाट जबलपुर