शब्द मेरे हैं
अर्थ मैंने ही दिये ये शब्द मेरे हैं !
व्यक्ति औ अभिव्यक्ति को एकात्म करते जो ,
यों कि मेरे आत्म का प्रतिरूप धरते हों !
स्वरित मेरे स्वत्व के
मुखरित बसेरे हैं !
शब्द मेरे हैं !
*
स्वयं वाणी का कलामय तंत्र अभिमंत्रित,
लग रहा ये प्राण ही शब्दित हुये मुखरित,
सृष्टि के संवेदनों की चित्र-लिपि धारे
सहज ही सौंदर्य के वरदान से मंडित !
शाम है विश्राममय
मुखरित सबेरे हैं !
शब्द मेरे हैं !
*
बाँसुरी ,उर-तंत्र में झंकार भरती जो ,
अतीन्द्रिय अनुभूति बन गुंजार करती जो
निराकार प्रकार को साकार करते जो
मनोमय हर कोश के
सकुशल चितेरे हैं !
शब्द मेरे हैं !
*
व्याप्ति है 'मैं' की जहाँ तक विश्व- दर्पण में ,
प्राप्ति है जितनी कि निजता के समर्पण में
भूमिका धारे वहन की अर्थ-तत्वों के,
अंजली भर -भर दिशाओं ने बिखेरे हैं !
*
पूर्णता पाकर अहेतुक प्रेम से लहरिल
मनःवीणा ने अमल स्वर ये बिखेरे हैं !
ध्वनि समुच्चय ही न
इनके अर्थ गहरे हैं !
शब्द मेरे हैं !
साभार: ईकविता
++++++++++++++
दिव्य नर्मदा : हिंदी तथा अन्य भाषाओँ के मध्य साहित्यिक-सांस्कृतिक-सामाजिक संपर्क हेतु रचना सेतु A plateform for literal, social and cultural writings. Bridges gap between HINDI and other languages, literature & other forms of expression.
स्तम्भ / लेबल
-acharya sanjiv 'salil'
(238)
-Acharya Sanjiv Verma 'Salil'
(195)
अंग्रेजी
(1)
अलंकार
(4)
अवधी
(4)
आयुर्वेद
(3)
आरोग्य आशा
(1)
कला
(1)
कविता
(32)
कहावत
(1)
कायस्थ
(1)
काव्यानुवाद
(3)
कुण्डलिनी
(1)
क्षणिका
(1)
गणेश
(1)
ग़ज़ल
(13)
गीत
(56)
गीति काव्य
(1)
गीतिका
(14)
घनाक्षरी
(2)
घरेलू नुस्खे
(3)
चिंतन
(3)
चित्रगुप्त
(5)
चौपाई
(1)
छत्तीसगढ़ी
(1)
जनक छंद
(1)
डॉ चित्रा चतुर्वेदी 'कार्तिका'
(1)
तसलीस (उर्दू त्रिपदी) अज़ीज़ अहमद अंसारी
(1)
दुर्गा
(3)
देश
(2)
दोहा
(65)
नर्मदा
(9)
नर्मदाष्टक
(1)
नव विधा
(1)
नवगीत
(40)
नारी विमर्श
(1)
निमाड़ी
(1)
नियाज़
(1)
नज़्म: संजीव 'सलिल'
(1)
परिचर्चा: चिट्ठाकारी और टिप्पणी-लेखन
(1)
पुरातत्व
(1)
पुस्तक समीक्षा
(1)
प्रकृति
(1)
प्राकृतिक चिकित्सा
(2)
प्रो. भागवत प्रसाद मिश्र 'नियाज़'
(1)
बाल साहित्य
(1)
बुंदेली
(1)
भक्ति काव्य
(1)
भजन
(15)
भवन
(1)
भारत
(7)
भोजपुरी
(5)
महादेवी वर्मा
(1)
मालवी
(1)
मुक्तक
(6)
मुक्तिका
(78)
मृदुल कीर्ति
(4)
राम
(7)
राष्ट्र वंदना
(1)
लघु कथा
(3)
लघुकथा
(13)
लेख: हिन्दी का हित चिंतन
(1)
विवाह गीत
(3)
विश्व काव्य सलिला : भागवत प्रसाद मिश्रा 'नियाज' '
(1)
शब्द सलिला: लखपति -अजित वडनेरकर
(1)
शान्ति देवी वर्मा
(1)
श्यामलाल उपाध्याय
(1)
श्यामानन्द 'सरस्वती'
(1)
श्री कृष्ण
(1)
संजीव 'सलिल'
(227)
संस्मरण
(1)
समाचार
(1)
साधना
(1)
सूक्ति सलिला: शेक्सपिअर
(1)
सूक्ति-सलिला:प्रो. बी. पी. मिश्र 'नियाज़' / सलिल
(1)
सोरठा
(1)
स्वर्गीय शान्ति देवी वर्मा
(1)
स्वास्थ्य: घरेलू नुस्खे
(1)
हरिगीतिका
(1)
हाइकु
(6)
हास्य
(6)
हिंदी
(6)
हिन्दी काव्यानुवाद
(1)
हिन्दी ग़ज़ल
(1)
हिन्दी छंद
(1)
ॐ
(1)
॥ श्रीरामरक्षास्तोत्र ॥
(2)
pratibha saksena लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
pratibha saksena लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
शनिवार, 20 फरवरी 2010
पठनीय रचना: शब्द मेरे हैं -प्रतिभा सक्सेना
प्रस्तुतकर्ता Posted by :
sanjiv verma
चिप्पियाँ Labels:
/samyik hindi kavya,
ekavita,
poetry,
pratibha saksena
| आपका मत your openion |
सदस्यता लें
संदेश (Atom)