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शनिवार, 15 अप्रैल 2017

chhand-bahar

ॐ 
छंद बहर का मूल है: ३
राग छंद
*
छंद परिचय:
बीस मात्रिक महादैशिक जातीय छंद।
तेरह वार्णिक अति जगती जातीय राग छंद।
संरचना: SIS ISI SIS ISI S
सूत्र: रजरजग।
बहर: फ़ाइलुं मुफ़ाइलुं 
मुफ़ाइलुं अल
*
आइये! मनाइए, रिझाइए हमें 

प्यार का प्रमाण भी दिखाइए हमें 
*
चाह में रहे, न सिर्फ बाँह में रहे 
क्रोध से तलाक दे न जाइए हमें 
*
''हैं न आप संग तो अजाब जिंदगी''
बोल प्यार बाँट संग पाइए हमें 
*
जान हैं, बनें सुजान एक हों सदा 
दे अजान रोज-रोज भाइये हमें 
*
कौन छंद?, कौन बहर?, क्यों पता करें?
शब्द-भाव में पिरो बसाइए हमें 
*
संत हों न साधु हों, न देवता बनें 
आदमी बने तभी सुहाइये हमें
*
दो, न दो रहें, न एक बनें, क्यों कहो?
जान हमारी बनें बनाइए हमें 
१५.४.२०१७ 
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