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बुधवार, 12 मार्च 2014

chhand salila: bhav chhand -sanjiv


छंद सलिला:
भव छंद
संजीव  * लक्षण: जाति रौद्र, पद २, चरण ४, प्रति चरण मात्रा ११, चरणान्त लघु गुरु गुरु या गुरु

लक्षण छंद:
एकादश पग रखो,
भवसिंधु पार करो
चरण आदि मन चाहा, चरण अंत गुरु से हो

उदाहरण:
१. आशा का बीज बो, कोशिश से फसल लो
   श्रम सीकर नर्मदा, भव तारें वर्मदा  
 
२. सूर्य चन्द्र सितारा, सकल जगत निखारा
    भव को जब निहारा, खुद को भी बिसारा
    रूप-रंग सँवारा, असुंदर न गवारा
    सच जिसने बिसारा, रण न लड़ रण हारा
    
३. समय शिला पर लिखो, सबसे आगे दिखो 
    शब्द नये उकेरो, नव उजास बिखेरो 
   
४. नित्य हरि गुण गाओ, मन में शांति पाओ
    छन्दों में मन रमा, कष्टों को दो भुला
(अब तक प्रस्तुत छंद: अखण्ड, अग्र, अचल, अचल धृति, अहीर, आर्द्रा, आल्हा, इंद्रवज्रा, उपेन्द्रवज्रा, उल्लाला, एकावली, ककुभ, कीर्ति, गंग, घनाक्षरी, चौबोला, चंडिका, छवि, जाया, तांडव, तोमर, दीप, दोधक, नित, निधि, प्रदोष, प्रेमा, बाला, भव, मधुभार, मनहरण घनाक्षरी, माया, माला, ऋद्धि, रामा, लीला, वाणी, शक्तिपूजा, शशिवदना, शाला, शिव, शुभगति, सार, सिद्धि, सुगति, सुजान, हंसी)
facebook: sahiyta salila / sanjiv verma 'salil'

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