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शुक्रवार, 9 मई 2014

chhand salila: sampada chhand -sanjiv


छंद सलिला:   ​​​



संपदा छंद

संजीव
*
छंद-लक्षण: जाति रौद्राक, प्रति चरण मात्रा २३ मात्रा, यति ११-१२, चरणांत लघु गुरु लघु (जगण/पयोधर)


लक्षण छंद: 
   शक्ति-शारदा-रमा / मातृ शक्तियाँ सप्राण
   सदय हुईं मनुज पर / पीड़ा से मुक्त प्राण
   ग्यारह-बारह सुयति / भाव सरस लय निनाद
   मधुर छंद संपदा / अंत जगण का प्रसाद
 
​उदाहरण:
१.  मीत! गढ़ें नव रीत / आओ! करें शुचि प्रीत
    मौन न चाहें और / गायें मधुरतम गीत
    मन को मन से जोड़ / समय से लें हम होड़
    दुनिया माने हार / सके मत लेकिन तोड़  
 
२. जनता से किया जो / वायदा न भूल आज
    खुद ही बनाया जो / कायदा न भूल आज
    जनगण की चाह जो / पूरी कर वाह वाह
    हरदम हो देश का / फायदा न भूल आज
   

३. मन मसोसना न मन / जो न सही, वह न ठान
    हैं न जन जो सज्जन / उनको मत मीत मान
    धन-पद-बल स्वार्थ का / कलम कभी कर न गान-
    निर्बल के परम बल / राम सत्य 'सलिल' मान.  
 
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(अब तक प्रस्तुत छंद: अखण्ड, अग्र, अचल, अचल धृति, अरुण, अवतार, अहीर, आर्द्रा, आल्हा, इंद्रवज्रा, उड़ियाना, उपमान, उपेन्द्रवज्रा, उल्लाला, एकावली, कुकुभ, कज्जल, कामिनीमोहन, कीर्ति, कुण्डल, कुडंली, गंग, घनाक्षरी, चौबोला, चंडिका, चंद्रायण, छवि, जग, जाया, तांडव, तोमर, त्रिलोकी, दीप, दीपकी, दोधक, दृढ़पद, नित, निधि, प्लवंगम्, प्रतिभा, प्रदोष, प्रभाती, प्रेमा, बाला, भव, भानु, मंजुतिलका, मदनअवतार, मधुभार, मधुमालती, मनहरण घनाक्षरी, मनमोहन, मनोरम, मानव, माली, माया, माला, मोहन, योग, ऋद्धि, रसामृत, राजीव, राधिका, रामा, लीला, वाणी, विशेषिका, शक्तिपूजा, शशिवदना, शाला, शास्त्र, शिव, शुभगति, सरस, सार, सिद्धि, सुगति, सुजान, संपदा, हरि, हेमंत, हंसगति, हंसी)
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