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मंगलवार, 7 जून 2016

sakhi chhand

रसानंद दे छंद नर्मदा ३३ : सखी  छन्द 
गुरुवार, ७  जून 2016 


​दोहा, ​सोरठा, रोला, ​आल्हा, सार​,​ ताटंक, रूपमाला (मदन), चौपाई​, ​हरिगीतिका, उल्लाला​,गीतिका,​घनाक्षरी, बरवै, त्रिभंगी, सरसी, छप्पय, भुजंगप्रयात, कुंडलिनी, सवैया, शोभन या सिंहिका, सुमित्र, सुगीतिका, शंकर, मनहरण (कवित्त/घनाक्षरी), उपेन्द्रवज्रा तथा इंद्रवज्रा छंदों से साक्षात के पश्चात् मिलिए​ सखी छन्द ​से

छन्द लक्षण -
सखी मानव जातीय चौदह मात्रिक छन्द है।  सखी छन्द के पंक्तयांत में लघु गुरु गुरु (१२२ यगण) या तीन गुरु (२२२ मगण) मात्राएँ होती हैं।  

लक्षण छंद -
चौदह सुमात्रा सखी है 
हो य-म तुकांती सदा ही। 
मानव न भूले हमेशा 
है वतन - भाषा पूजा ही।।  
संकेत- य-म = यगण या मगण 

उदाहरण- 
०१.  मुक्तिका 
*
आँख जब भी बोलती है 
राज दिल के खोलती है 
.
मन बनाता है बहाना 
जुबां गुपचुप तोलती है 
*
ख्वाब करवट ले रहे हैं 
संग कोशिश डोलती है 
*
कामना जनभावना हो 
श्वास में रस घोलती है 
*
वृत्ति आदिम सगा-साथी 
झुका आँख टटोलती है 
*
याचनामय दृष्टि, दाता 
पेंडुलम संग डोलती है 
*
२. राजनीति मायावी है 
    लोभ नीति ही प्यारी है 
    लोक नीति से दूरी है 
    देश भूल मक्कारी है 
***
    
facebook: sahiyta salila / sanjiv verma 'salil' 

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